मौलाना अबुल कलाम आजाद

मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने । उन्होंने ग्यारह वर्षों तक राष्ट्रनीति का मार्गदर्शन किया । शिक्षामंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की । ‘भारतीय औद्योगिक संस्थान, अर्थात् आई.आई.टी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का श्रेय उन्ही को जाता है । संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ललित कला अकादमी की स्थापना उन्ही के कार्यकाल में की गई । उनके द्वारा स्थापित भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद् आज कला, संस्कृति और साहित्य के विकास और संवर्धन के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्था के रुप में विख्यात है । इसकी शाखाएं देश के प्रत्येक बड़े शहर में सफलता पूर्वक कार्य कर रही है और देश तथा विदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ाने में प्रयासरत   हैं ।

 

मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 ई. में मक्का में हुआ था । उनका असली नाम अबुल कलाम गुलाम मोहिउद्दीन था । उनके पिता मौलाना खैरुद्दीन ने एक अरब महिला ’आलिया’ से विवाह किया था । मौलाना खैरुद्दीन स्वयं एक प्रसिध्द विद्वान थे और उन्होंने दर्जनों पुस्तकें लिखी थी । मौलाना आजाद के पूर्वज अफगानिस्तान से आकर बंगाल में बस गए थे । मौलाना आजाद के पिता प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत छोड़कर मक्का में जाकर बस गए जहाँ मौलाना आजाद का जन्म हुआ । बाद में उनका परिवार पुनः भारत लौट आया और कलकत्ता में बस गया । तेरह वर्ष की आयु में उनका विवाह जुलेखा बेगम से हुआ था ।

 

 मौलाना आजाद बचपन से ही कुशाग्र बुध्दि के थे । उन्होंने उर्दू, हिन्दी, फारसी, बंगाली, अरबी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओँ में महारत हासिल कर ली थी । वे कवि, लेखक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे । अल्पायु में ही उन्होंने कुरान के पाठ में निपुणता हासिल कर ली थी । उन्होंने काहिरा के अल अजहर विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की । कोलकात्ता में उन्होंने ‘लिसान-उल-सिद’ नामक पत्रिका प्रारंभ की । तेरह से अठारह साल की उम्र के बीच उन्होंने बहुत सी पत्रिकाओं का संपादन किया । 1912 में उन्होंने ‘अल हिलाल’ नामक एक उर्दू अखबार का प्रकाशन प्रारंभ किया । इस अखबार ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । मौलाना आजाद ने कई पुस्तकों की रचना और अनुवाद भी किया । उनके द्वारा रचित पुस्तकों में ‘इंडिया विन्स फ्रीडम’ और ‘गुबार-ए-खातिर’ प्रमुख हैं ।

मौलाना अबुल कलाम आजाद ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में बढ़-चढ़ कर भाग लिया    था । वे एक पक्के राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी थे । अंग्रेजी शासन के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा । उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल होकर अंग्रेजी शासन का विरोध किया । उन्होंने अपनी एक साप्ताहिक पत्रिका ‘अल-बलाग’ में हिन्दू-मुस्लिम एकता पर आधारित भारतीय राष्ट्रवाद और क्रांतिकारी विचारों का प्रचार-प्रसार किया । भारत विभाजन के समय भड़के हिन्दू-मुस्लिम दंगों के दौरान मौलाना आजाद ने हिंसा प्रभावित बंगाल, बिहार, असम और पंजाब राज्यों का दौरा किया और वहां शरणार्थी शिविरों में रसद आपूर्ति और सुरक्षा का बंदोबस्त किया । मौलाना आजाद हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षधर और भारत विभाजन के घोर विरोधी   थे । वे प्रचंड विद्वान और शिक्षाविद् होने के साथ-साथ दूर-दृष्टा भी थे ।

मौलाना अबुल कलाम आजाद देश की सेवा करते हुए 22 फरवरी, 1958 को मृत्यु को प्राप्त हुए । 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया । देश में शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान स्वरुप उनके जन्म दिवस, 11 नवम्बर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया गया है । उनके सम्मान में पूरे देश में अनेकों शिक्षा संस्थानों और संगठनों का नामकरण उनके नाम पर किया गया है ।