सम्मेलन और संगोष्ठी

 

"भारतीय प्रवासी एवं सांस्कृतिक विरासत: अतीत, वर्तमान और भविष्य (11-13 फ़रवरी, 2015)"

सम्मेलन

भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक कूटनीति में भारत के कौशल में वृद्धि करने और सभ्यताओं के बीच संवाद को सुदृढ़ करने के लिए, परिषद् भारतीय विद्या, बौद्ध धर्म, सूफी मत, टैगोर और भारतीय संस्कृति, दर्शन और समाज से संबंधित अन्य विषयों जैसे विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन करती है।

ये सम्मेलन अंततः परिषद् को भारत की महान सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रफूल्लता को प्रस्‍तुत करने को जारी रखने के अपने संकल्प को पूरा करने में सहायता करते हैं। भारत की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए इस विचार को बनाए रखने और साझा करने के लिए ये सम्मेलन एक ही मंच पर प्रख्यात भारतीय विद्वानों और अन्य अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को लाने के साथ बहुत ही उपयोगी और परस्‍पर संवादात्‍मक (इंटरेक्टिव) साबित होते हैं।

भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद् भारतीय साहित्य, बौद्ध धर्म, भाषा, भारतीय कला और संस्कृति जैसे विषयों पर संगोष्‍ठी और सम्मेलनों के आयोजन के लिए कई शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और गैर सरकारी संगठनों को समर्थन प्रदान करती है।

हाल ही में आयोजित किए गए प्रमुख कार्यक्रमों में सार्क साहित्य महोत्सव, रचनात्मक उद्योग पर एशिया का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, दिल्ली विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म पर दो सम्मेलन, कालीकट विश्वविद्यालय में भारतीय विद्या पर एक इत्‍यादि थें।

भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद् ने कैंडी, श्रीलंका में 20-21 मार्च, 2011 को विदेश मंत्रालय और श्रीलंका के बुद्धासास्‍ना और धार्मिक मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन भी किया।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में 26 मार्च, 2014 को "वर्तमान और भविष्य के लिए पारंपरिक संस्कृतियों की प्रासंगिकता" विषय पर सम्मेलन में अध्‍यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् द्वारा समापन भाषण के लिए यहां क्लिक करें।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् द्वारा वर्ष 2009 और 2010 में आयोजित कुछ महत्वपूर्ण सम्मेलनों और संगोष्ठियों की सूची के लिए यहां क्लिक करें।

अप्रैल, 2012 से मार्च, 2013 के दौरान आयोजित सम्मेलनों की सूची के लिए यहां क्लिक करें।

वर्ष 2013-2014 में आयोजन सम्मेलनों की सूची के लिए यहां क्लिक करें।

 

कैंडी, श्रीलंका में 20-21 मार्च, 2011 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन

महामहिम महिन्दा राजपक्षे, श्रीलंका लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य के अध्‍यक्ष ने  भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (भा.सां.सं.प.) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए आज सुबह श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध अकादमी (एसआईबीए) का दौरा किया। विदेश मंत्रालय और श्रीलंका के बुद्धासास्‍ना और धार्मिक मामलों के मंत्रालय, साथ में श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध अकादमी और पेरेदेनिया विश्वविद्यालय सम्‍मेलन के लिए भागीदारी संस्‍थान थे, जिसका आयोजन भगवान बुद्ध के ज्ञान की प्राप्ति की 2600वीं वर्षगांठ को भारत और श्रीलंका द्वारा संयुक्त स्मरणोत्सव के भाग के रूप में मनाने के लिए किया गया था। सम्मेलन के उद्घाटन में माननीय डी.एम. जयरत्‍ने, प्रधानमंत्री, प्रो जी.एल. पीरिस, श्रीलंका के माननीय विदेश मंत्री, श्री अशोक के. कांथा, भारत के उच्चायुक्त और श्री सुरेश कुमार गोयल, महानिदेशक, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की मौजूदगी ने भी शोभा बढ़ाई।

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उद्घाटन समारोह के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व महानिदेशक श्री सुरेश कुमार गोयल के भाषण के लिए यहां क्लिक करें।

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