भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (भा.सां.सं.प.) की स्थापना स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा 1950 में की गई थी।

परिषद् का उद्देश्य भारत के विदेशी सांस्कृतिक संबंधों से संबंधित नीतियां और कार्यक्रम तैयार करना और उनके कार्यान्वयन में भागीदारी करना; भारत और अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और पारस्परिक समझ को बढ़ाना और मजबूत करना; अन्य देशों और लोगों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना; संस्कृति के क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से संबंध स्थापित करना और उन्हें विकसित करना; और ऐसे कदम उठाना है जो इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हों।

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भा.सां.सं.प. का संबंध संस्कृतियों के समन्वय, अन्य देशों के साथ रचनात्मक संवाद से है। विश्व की संस्कृतियों के साथ इस पारस्परिक विचार-विमर्श को सुगम बनाने के लिए परिषद् देश में और विश्व के अन्य देशों के साथ भारत की संस्कृतियों की विविधता और समृद्धि को व्यक्त और प्रदर्शित करने का प्रयास करती है।

परिषद् सांस्कृतिक कूटनीति में लगे रहने और भारत एवं अन्य सहभागी देशों के बीच बौद्धिक आदान-प्रदान को प्रायोजित करने वाली पूर्व-प्रतिष्ठित संस्था होने पर स्वयं को गौरान्वित महसूस करती है। परिषद् का यह संकल्प है कि आने वाले वर्षों में भारत की महान सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रफुल्लता के प्रतीक को बनाए रखे।